display ads

Mujhe saye se Mohabbat ho gai h...

ज़रा छू लूँ तुमको कि मुझको भी यकीं आ जाये, 
लोग कहते हैं मुझे साये से मोहब्बत हों गयी हैं


Tujh se ho gaya ishq ab khasara kaisa
Dariya e ishq  mein utar gae ab kinara kaisa
Ek baar tere ho gae bas ho gae
Roz karna naya istekhara kaisa



न जाहिर हुई तुमसे और न ही बयान हुई हमसे,
बस सुलझी हुई आँखो में उलझी रही मोहब्बत।


यकीन है मोहब्बत पर और गुमान भी है,
वो मेरा ही है चाहे जहाँ भी है.
दूरियाँ बेशक हैं जो ना मिटेंगी कभी,
पर जुड़ा है ये दिल उस दिल से जहाँ भी है.
माँगा नहीं मोहब्बत को उस खुदा से मैने कभी,
सोचा गर मोहब्बत सच्ची है तो वो अपना ही है.
जैसा भी है जहाँ भी है बस आज भी मेरा ही है,
यकीन है अपनी मोहब्बत पर और गुमान भी है.


अहसास बदल जातें हैं और कुछ नहीं 
वरना 
मोहब्बत और नफरत एक ही दिल से होती है|


मोहबत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है,
और जो बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं उनको, हमारा ये पैग़ाम हैं,
वादा-ए-वफ़ा करो तो फिर खुद को फ़ना करो,
वरना खुदा के लिए किसी की ज़िंदगी ना तबाह करो




Post a Comment

0 Comments