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Meri Mohabbat Hai Wo



मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही
वो मुझे चाहे या मिल जाये,जरूरी तो नही
ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो
सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही


Meri Mohabbat hai Wo koi or Nahi
Wo Mujhe Chahe Ya Mil jaye Zaroori To Nahi
Ye kuchkam Hai ki basa Hai Meri Sanso Me
Samne Ho Meri Aankho ke Zaroori To Nahi



खामोश रातो में सिर्फ एक उसकी याद और उसके ख्वाब
काश, मैंने मोहब्बत ना की होती तो कब का सो गया होता



Khamosh Rato Me Sirf ek Uski Yad or Uske khab aate Hain,Maine Mohabbat Na ki Hoti to Kab ka so gya Hota.



तुम चाहो अगर तो लिख दो इश्क़ मेरी ततक़दीर में
तुमसे खूबसूरत स्याही तो जन्नत में भी नहीं होगी



Tum Xhaho Agar to Likh do ishq Meri Taqdir Me
Tumse khubsurat Syahi to Jannat me bhi Nahi Hogi



कौन मेरी चाहतों का फसाना समझेगा इस दौर में
यहाँ तो लोग अपनी जरुरत को मोहब्बत कहते हैं



Kon Meri Chahton ka fasana Samjhega is Dor Me,
Yahan to log Apni Zaroorat ko Mohabbat Kahte hain.



तुम दूर जाओ तो बेचैनी मुझे ही होती हैं
महसूस करके देखो मोहब्बत ऐसी ही होती है



Tum Door jao to Bechaini Mujhe Hoti Hai
Mahsoos karke Dekho Mohabbat Aisi Hoti Hai.



मुहब्बत देखी है हमने ज़माने भर के लोगों की
जहाँ कुछ दाम ज़्यादा हों वहाँ इन्सान बिकते हैं



Mohabbat Dekhi Hai Humne Zamane Bhar ke Logon ki,
Jahan kuch Daam zyada ho Wahann insan bikte Hain.



मोहब्बत रूह में उतरा हुआ मौसम है जनाब,
ताल्लुक कम करने से मोहब्बत कम नहीं होती



Mohabbat rooh Me Utra Hua Mosam Hai Janab,
Taluk kam k
karne se Mohabbat kam Nahi Hoti



साँसे मेरी, जिन्दगी मेरी और मोहब्बत भी मेरी
मगर हर चीज मुकम्मल करने के लिए जरुरत तेरी

Sanse Meri Zindagi Meri or Mohabbat Bhi Meri,
Magar Har chiz Mukammal karne ke liye Zaroorat Teri.



वक्त वो भी था जब ख्वाहिशें अपनी जिद पर थी
अब ये आलम है के तेरी रज़ा ही मेरी रजा लगती है



Waqt wo Bhi Tha jab khahishe Apni zid par thi,
Ab ye aalam Hai ke Teri raza Hi Meri Raza Lagti hai.



मैं तेरे शहर में आया हू , खुद की महफ़िल सजाने आया हूं
तेरे इश्क की इस आंधी में ,खुद को फिर मिटाने आया हूं .
मैं भी तेरा दीवाना हू ,बस यही बात बताने आया हू
तेरे इश्क की मासूमियत में ,खुद को फिर लुटाने आया हू .
मैं भी कितना बांवरा हू ,यह तुझे जताने आया हू
तेरे इश्क के शहर में ,खुद की प्यास बुझाने आया हू .
तुम मेरी हो – तुम मेरी हो ,बस यही तुम्हें कहने आया हू
तेरे इश्क के शहर में ,खुद की महफ़िल सजाने आया हू




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