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Hindi Shayari


दिल की हालात बताई नहीं जाती
हमसे उनकी चाहत छुपाई नहीं जाती
बस एक याद बची है उनके चले जाने के बाद
हमसे तो वो याद भी दिल से निकाली नहीं जाती



एक  तिल का पहरा भी जरूरी है,लबो के आसपास
मुझे डर है कहीं तेरी मुस्कुराहट को नज़र न लगा दे कोई



तुमने कहा था आँख भर कर देख लिया करो मुझे
अब आँख भर जाती हैं पर तुम नज़र नही आते



जाने मेरी आँखों से कितने आँसू बह गए
इंसानो की इस भीड़ में देखो हम तनहा रह गए
करते थे जो कभी अपनी वफ़ा की बातें
आज वही सनम हमें बेवफ़ा कह गए..



हुजूम  देख के रस्ता नहीं बदलते हम
किसी के डर से तक़ाज़ा नहीं बदलते हम
हज़ार ज़ेर-ए-क़दम रास्ता हो ख़ारों का
जो चल पडें तो इरादा नहीं बदलते हम


खामोशी से बिखरना आ गया है
हमें अब खुद उजड़ना आ गया है
किसी को बेवफा कहते नहीं हम
हमें भी अब बदलना आ गया है
किसी की याद में रोते नहीं हम
हमें चुपचाप जलना आ गया है
गुलाबों को तुम अपने पास ही रखो,
हमें कांटों पे चलना आ गया है




शायरी नहीं आती मुझे बस हाले दिल सुना रहा हूँ
बेवफ़ाई का इलज़ाम है, मुझपर फिर भी गुनगुना रहा हूँ
क़त्ल करने वाले ने कातिल भी हमें ही बना दिया
खफ़ा नहीं उससे फिर भी मैं बस, उसका दामन बचा रहा हूँ।



आकाश मे डूबा एक प्यारा तारा है
हमको तो किसी की बेवफ़ाई ने मारा है
हम उनसे अब भी मोहब्बत करते हैं
जिसने हमे मौत से भी पहेले मारा है



तेरी याद में..तबियत मचल जाती है
वक़्ते-शाम की..सूरत बदल जाती है
जब तीर ख़्यालों का...चुभता है जिग़र में
मेरे सब्र की नीयत...पिघल जाती है



पल पल उसका साथ निभाते हम
एक इशारे पर दुनिया छोड़ जाते हम
समुन्दर के बीच में पहुंचकर फरेब किया उसने
वो कहता तो किनारे पर ही डूब जाते हम

जब खामोश आँखो से बात होती है
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है
तुम्हारे ही ख़यालो में खोए रहते हैं हम
पता नही कब दिन और कब रात होती है


आँखों में देख कर वो दिल की हकीकत जानने लगे।
उनसे कोई रिश्ता भी नहीं फिर भी अपना मानने लगे।
बन कर हमदर्द कुछ ऐसे उन्होंने हाथ थामा मेरा।
कि हम खुदा से दर्द की दुआ मांगने लगे।


छलकते दर्द को होठों से बताऊं कैसे
ये खामोश गजल मैं तुमको सुनाऊं कैसे
दर्द गहरा हो तो आवाज़ खो जाती है
जख़्म से टीस उठे तो तुमको पुकारूं कैसे
मेरे जज़्बातों को मेरी इन आंखों में पढ़ो
अब तेरे सामने मैं आंसू भी बहाऊं कैसे
इश्क तुमसे किया, जमाने का सितम भी सहा
फिर भी तुम दूर हो हमसे, ये जताऊं कैसे


तेरे लिबास से मोहब्बत की है,
तेरे एहसास से मोहब्बत की है
तू मेरे पास नहीं फिर भी,
मैंने तेरी याद से मोहब्बत की है
जिन में हो सिर्फ तेरी और मेरी बातें,
मैंने उन अल्फाज से मोहब्बत की है
जो महकते हो तेरी मोहब्बत से,
मैंने उन जज्बात से मोहब्बत की है
जिनसे मेरे दिल को सुकून मिलता है,
मैंने उन चैन-ओ-करार से मोहब्बत की है
तुझ से मिलना तो अब एक ख्वाब लगता है,
इसलिए मैंने तेरे इंतजार से मोहब्बत की है




पल पल उसका साथ निभाते हम
एक इशारे पर दुनिया छोड़ जाते हम
समुन्दर के बीच में पहुंचकर फरेब किया उसने
वो कहता तो किनारे पर ही डूब जाते हम


Basa Hai Aankho Mein Unka Chehra Is Tarah,
Gulabo Mein Khushbu Basi Ho Jis Tarah,
ibadat ki Ho Aur Dua Na Mangi Ho,
Unki Kami khalti Hai mujhe Kuch Is Tarah.







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