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रिश्ते हम दोनों के कितने अजीब थे۔۔۔

आप आँखों से दूर दिल के करीब थे
हम आपके और आप हमारे नसीब थे
न हम मिल सके, न जुदा हुए
रिश्ते हम दोनों के कितने अजीब थे

آپ آنکھوں سے دور دل کے قریب تھے
ہم آپ کے اور آپ ہمارے نصیب تھے
نہ ہم مل سکے، نہ جدا ہوۓ
رشتے ہم دونوں کے کتنے عجیب تھے

जब जब देखता हूँ तुम्हे संवरते ऐसे
लगता है एक चांद ने चार चाँद लगाए हों जैसे

جب جب دیکھتا ہوں تمہیں سنورتے ایسے
لگتا ہے ایک چاند نے چار چاند لگاۓ ہوں جیسے
जिंदगी में एक दूसरे के जैसा होना जरूरी नहीं होता
एक दूसरे के लिए"होना"जरूरी होता है
 बडे ही गजब की बात है!!!
"मन" कपडा नहीं फिर भी मैला हो जाता है
और “दिल" काँच नहीं फिर भी टूट जाता है
स्वयं को सोने के सिक्के की तरह बनायें
जो कभी नाली में गिर भी जाये,तो उसकी किमत कम ना हो




वो दर्द ही क्या जो आँखों से बह जाए
वो खुशी ही क्या जो होठों पर रह जाए
कभी तो समझो मेरी खामोशी को
वो बात ही क्या जो लफ्ज़ आसानी से कह जायें



मोहब्बत की अदालत से मेरी दर्खास्त कर दो,
बहुत काट ली सजा, यादों से अब रिहा कर दो।


محبت کی عدالت سے میری درخواست کردو
بہت کاٹ لی سزا اب رہا کردو



जब जब देखता हूँ तुम्हे संवरते ऐसे
लगता है एक चांद ने चार चाँद लगाए हों जैसे

جب جب دیکھتا ہوں تمہیں سنورتے ایسے
لگتا ہے ایک چاند نے چار چاند لگاۓ ہوں جیسے



क्या हसीन इत्तेफ़ाक था तेरी गली में आने का
किसी काम से आये थे, किसी काम के नहीं रहे

کیا حسین اتفاق تھا تیری گلی میں آنے کا
کسی کام سے آۓ تھے، کسی کام کے نہیں رہے



मेरी रूह से मिली है रूह उसकी
फ़क़त हाथों को कसने से मोहब्बत नहीं होती



उड़ाई है ये अफवा किसी ने के मुझे तुमसे महोब्बत है
सुनो
अगर तुम इकरार कर लो तो मै भी यकीन कर लूं



Meri Mohabbat Hi Dekhni Hai , To Gale Lagakar Dekho
Agar Dhadkan Na Ruk Gae To Mohabbat Thukra Dena



Koi  to ho rasta Koi to Rahebar mile
Zalim mohabbat ke shikaar Masoom hi Q hote hai 



छू जाते हो तुम मुझे कितनी ही दफ़ा ख्वाब बनकर
ये दुनिया तो खामखां कहती है कि तुम मेरे नसीब में नहीँ



तुम गैर हो चुके हो इस बात की ज़माने को खबर है
पर हम तो सिर्फ तेरे ही है इस बात से तू आज भी बेखबर है



आप से दिल में थोड़ी सी जगह माँगी थी,
मुसाफिरों की तरह,
आपने तन्हाईयों का एक शहर
मेरे नाम कर दिया।



क्या दिल को क्या समझाएं 
इश्क़ की बारीक़ियाँ 
वो तो बस मशग़ूल है 
तुझसे मोहब्बत करने में



मेरी गरीबी को देख कर
मुझसे घिन्न ना किया कर
मुझे भी उसने गरिब बनाया है
जिस ने तुझे अमीर बनाया है


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نـــــہ کـــــر مـحـبت مـیں مـجـهے آزمـانـے کـی ضـد.
پـــــانـی مـــــیں کـبهی پـتـهر تـیـرا نـہـیـں کـرتـــــے.


ना कर मोहब्बत में मुझे आजमाने की ज़िद
पानी में कभी पथर तैरा नहीं करते




प्यार वो हम को बेपनाह कर गये
फिर ज़िनदगीं में हम को,तन्नहा कर गये
चाहत थी उनके इश्क में,फ़नाह होने की
पर वो लौट कर आने को,भी मना कर गये





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